मंगलवार, 6 अगस्त 2019

◆ द ट्रुथ बिहाइंड ऑन एयर : पुष्पेन्द्र वैद्य

पुष्पेन्द्र वैद्य की इस किताब को पढ़ने से पहले बहुत सारी बातों से अनजान था। अनजान इसलिए कि मीडिया के शब्दकोश और उसकी प्रक्रिया समझने की तरफ़ कभी ध्यान ही नहीं गया। टीआरपी, पीटीसी, वॉक थ्रू, टिक टैक, माइक आईडी आदि शब्दों के वास्तविक अभिप्राय और इनकी क्रियान्वयन प्रक्रिया के बारे में अब जाना।
टीवी पत्रकारिता से जुड़े अन्य तमाम तथ्यों को दूर बैठकर समझना और उसकी तह तक पहुँचना मीडिया से बाहर के व्यक्ति के लिये आसान नहीं। जिन मीडिया कर्मियों को किसी दुर्घटना के समय सवाल करते और तस्वीरें लेते देखकर हम बुरी तरह झुँझला जाते हैं और उनकी अमानवीयता और बेवकूफ़ी की आये दिन चर्चा करते हैं, उनके ऊपर चैनल के मालिकों और उच्चाधिकारियों का कितना बड़ा दबाव होता है, उसे यह किताब पढ़कर जाना जा सकता है।

पुष्पेन्द्र वैद्य पिछले तीस वर्षों से सक्रिय रूप से पत्रकारिता कर रहे हैं। इस अवधि में दैनिक नवभारत के बाद आजतक और इंडिया टीवी के साथ 17 वर्षों का महत्वपूर्ण समय बिताया है उन्होंने। इन सत्रह वर्षों में जहाँ उन्होंने पत्रकारिता के अनूठे और यादगार अनुभव हासिल किए वहीं टीआरपी के चक्कर में भूत प्रेत, तंत्र-मंत्र, स्टिंग ऑपेरशन, झूठे रियलिटी चेक और ढेरों निरर्थक हाई प्रोफाइल केसेज कवर करने के की बाध्यता के कारण सैकड़ों बुरे अनुभव भी हुए।

पुष्पेन्द्र बताते हैं कि बड़े मीडिया समूहों द्वारा थर्ड डिग्री स्तर के टॉर्चर और अनियमित, अमानवीय कार्यप्रणाली को झेलते मीडियाकर्मी ब्लड प्रेशर, हाइपर टेंशन, शुगर और स्लिप डिस्क जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।

सिर्फ़ टीआरपी के खेल में डूबे मीडिया के संवेदनहीन और क्रूर चेहरे की एक तस्वीर बेसाख़्ता उद्वेलित कर जाती है। जनवरी 2018 में इंदौर में एक स्कूल बस दुर्घटनाग्रस्त हुई थी जिसमें ड्राइवर सहित कई मासूम बच्चों की जान चली गई थी। किसी सभ्य समाज के लिए कितना हृदयविदारक दृश्य रहा होगा उस समय! और उसी समय मीडिया चैनल्स के दफ़्तरों से फ़रमान आने लगते हैं कि " रोते बिलखते लोगों के शॉट्स भेजो, बच्चों की तस्वीर भेजो, परिजनों के गुस्से की बाईट भेजो।" एक तरफ़ परिजनों का अथाह दुःख, आक्रोश, दूसरी तरफ़ ऐसी बेहूदा माँगें...

बहुत बहुत शुक्रिया पुष्पेन्द्र भाई! मीडिया के इस चेहरे को खुलकर बेनकाब करने के लिए, और यह किताब हम तक पहुँचाने के लिए विशेष धन्यवाद।

किताब के आरम्भ में अपनी बात बताते हुए पुष्पेन्द्र उन पुराने दिनों की याद भी ताजा करते हैं जब न्यूज़ चैनल्स की टीआरपी भले कम होती थी किन्तु पत्रकारों और पत्रकारिता को भरपूर आदर मिलता था। उन दिनों पत्रकारिता करने पर गर्व होता था। एक समाचार बड़ी बड़ी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होता था क्योंकि सरकार और प्रशासन उन खबरों के प्रति गंभीर और उत्तरदायी अनुभव करता था।

'द ट्रुथ बिहाइंड एयर' जयपुर के 'कलमकार मंच' ने प्रकाशित की है। इस संस्था से अनुरोध है कि आगामी योजनाओं / संस्करणों में प्रूफ़ पर विशेष ध्यान दें। इस किताब में प्रूफ़ की कमियाँ औसत से काफी ज़्यादा हैं।

●● और अब एक सूचना....

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3, विष्णु विहार, अर्जुन नगर, दुर्गापुरा, जयपुर-302018
राजस्थान )

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