मंगलवार, 29 जनवरी 2019

एक औरत की नोटबुक

क्या कहानियाँ सिर्फ़ दोपहर की फ़ुरसत में महिलाओं को अच्छी नींद सुलाने के लिए लिखी जानी चाहिए? क्या हर कहानी का पहला उद्देश्य मात्र मनोरंजन होना चाहिए? नहीं। बेशक कहानियों से कोई बड़ा सामाजिक आंदोलन खड़ा नही किया जा सकता पर जीवन को बेहतर बनाने में, सामाजिक कुरीतियों को अपदस्थ करने में, व्यक्ति को उसके इर्द गिर्द फैली विसंगतियों के प्रति जागरूक और चौकस करने में हर प्रकार के रचना-कर्म की एक निश्चित सकारात्मक भूमिका होती है।
मैं दुपहर की फ़ुरसत में नींद दिलाने के लिए कहानियाँ नही लिखती। कहानी पढ़कर आती हुई नींद भाग जाए और पढ़ने वाले के दिमाग में थोड़ा सा ख़लल पैदा करे, कुछ सोचने पर मज़बूर करे, घर के पिछवाड़े फेंक दी गयी या जानबूझकर आँखों से ओझल कर दी गई कुछ अनचाही स्थितियों को सामने ला खड़ा करे - तभी कहानी लिखने का मक़सद पूरा होता दिखाई देता है।

सुधा अरोड़ा
( एक औरत की नोटबुक )

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